शुक्रवार, 2 मार्च 2018

मास्साब की होली

एक मास्टर साहब थे सीधे-सादे,
रहते थे विभाग का बोझ लादे।
सब उनको टेढ़ा सिंह बुलाते थे,
बेचारे विरोध भी न कर पाते थे।

वो सीधापुर गाँव में थे नियुक्त,
जिसमें रहते थे कई अभियुक्त।
सीधापुर में सब के सब थे टेढ़े,
मास्टर जी को कई बार खदेड़े।

बेचारे कैसे भी नौकरी कर रहे थे,
विद्यालय में एकलौते मर रहे थे।
कभी प्रधान कभी अध्यक्ष हड़काते,
कभी-कभी तो बच्चे ही लड़ जाते।

विभागीय योजनाओं का था भार,
फिर भी बच्चों को रहे थे सँवार।
सूचनाएँ बनाने के बाद पढ़ाते थे,
बच्चों का भविष्य सुंदर बनाते थे।

बीएलओ बनने से किस्मत थी फूटी,
छुट्टी बर्बाद करती पोलियो की ड्यूटी।
बेचारे कई रविवार को भी जाया करते,
मास्टर होने की कीमत चुकाया करते।

अबकि देखी जब अवकाश की सूची,
होली अवकाश से आशाएँ हुईं ऊँची।
सोचा चार दिन तक घर पर रह पाएँगे,
पत्नी-बच्चों के साथ समय बिताएँगे।

पर होली वाली सुबह को आया संदेश,
विद्यालय के साथ में सेल्फी करो पेश।
प्रधान, अध्यक्ष, बच्चों के रंग लगाओ,
आख्या को व्हाट्सएप्प पर भिजवाओ।

पत्नी, बच्चों ने मास्टर जी को रोका,
बोले मत जाइए होली का है मौका।
साल में होली आती है एक ही बार,
साथ में रहकर मनाइए न त्यौहार।

मास्टर जी बोले जाने का नहीं है मन,
पर न गया तो कट सकता है वेतन।
त्यौहार पर भी जो न रह पाता है घर,
ऐसा व्यक्ति ही तो कहलाता मास्टर।

अवकाश की प्रसन्नता हुई चकनाचूर,
उन्हें रंग लगाने जाना था अति दूर।
तन था हल्का पर मन हो गया भारी,
तुरन्त पकड़ी विद्यालय को सवारी।

बेचारे डग्गामार वाहनों के धक्के खाए,
तब जाकर सीधापुर तक पहुँच पाए।
सबसे पहले गये ग्राम प्रधान के घर,
काँपते हाथों से कुंडी बजायी जमकर।

कुछ देर में प्रधान जी निकलकर आए,
रंगे हुए मास्टर जी को न पहचान पाए।
बोले ऐ! पीले, काले, गुलाबी और लाल,
कौन हो तुम क्यों मचा रहे हो बवाल।

मास्टर जी ने पहले किया अभिवादन,
फिर सेल्फी खिंचवाने का निवेदन।
प्रधान बोले सेल्फी तभी खिंचवाऊँगा,
जब इस योजना में हिस्सा पाऊँगा।

न तुम शौचालय में घपला करवाते हो,
न ही मिड डे मील में कुछ खिलाते हो।
भुगतान किए मैंने पर कुछ न भोगा,
अब सेल्फी में तो कुछ देना ही होगा।

मास्टर जी बोले सुनो तो पूरा किस्सा,
सेल्फी खिंचवाने में माँगो न हिस्सा।
रंग अपने पैसों से खरीदकर हूँ लाया,
फोटो निकलवाने का पैसा न आया।

इसलिए मेरी विनती कीजिए स्वीकार,
आप रंग लगवाने को हो जाइए तैयार।
बुरा मुँह बनाकर प्रधान ने लगवाया रंग,
सेल्फी लेने को करनी बड़ी बहुत जंग।

फिर अध्यक्ष को ढूँढने को गाँव में घूमे,
पता चला अध्यक्ष जी तो नशे में झूमे।
बड़ी मुश्किल से मास्टर जी को पहचाने,
और पहचानते ही लग गए गरियाने।

बोले मास्टर होली में चैन नहीं है तुम्हें,
क्यों नहीं परिवार संग बिता रहे लम्हें।
मास्टर जी बोले अध्यक्ष जी मजबूरी है,
तभी तो त्यौहार पर भी घर से दूरी है।

आपको रंग लगाकर फोटो खिंचवाना है,
फिर आख्या बनाकर अभी पहुँचाना है।
अध्यक्ष बोले रंग लगवाने को दो पैसे,
मैं फ्री में यूँही सेल्फी खिंचवा लूँ कैसे।

यूनिफॉर्म, स्वेटर में तुमने न करी कमाई,
न ही तब कुछ दिया जब हुई थी पुताई।
सेल्फी खिंचवाने को तो करो हिस्सबाँट,
वर्ना अधिकारियों से लगवा दूँगा डाँट।

मास्टर जी बोले सुनिए प्रिय अध्यक्ष,
तनिक जान लीजिए हमारा भी पक्ष।
प्रत्येक काम का पैसा नहीं आता है,
मास्टर अपनी जेब से ही लगाता है।

सेल्फी खिंचवाने आया नहीं अनुदान,
हमें अपने पास से ही करना भुगतान।
कृपया आप हमसे रंग लगवा लीजिए,
सेल्फी के लिए मुँह को साफ कीजिए।

फिर मास्टर जी ने अध्यक्ष को धुलवाया,
सेल्फी लेने के लिए चेहरे को सुधरवाया।
फूले मुँह से अध्यक्ष ने सेल्फी खिंचवायी,
मास्टर जी ने भागकर जान छुड़वायी।

अब मास्टर जी ने ढूंढ़ी बच्चों की टोली,
जो कीचड़ में उतर खेल रहे थे होली।
विद्यालय जो आते पहनकर कपड़े फ़टे,
वो यूनिफॉर्म पहनकर कीचड़ में थे डटे।

छुट्टी में मास्टर जी की गाँव में छाया,
ये किसी बच्चे को पसंद नहीं आया।
मास्टर जी को देखकर मुँह को घुमाया,
कुछ ने चेहरे पर और कीचड़ लगाया।

लेकिन मास्टर जी भी थे आखिर मास्टर,
कीचड़ में से भी पकड़ लिया ढूंढकर।
बच्चों बोले ओ! मास्साब हमें न पकड़ो,
हम प्राइवेट में पढ़ते हैं हमें न जकड़ो।

मास्टर जी बोले मुझसे न बच पाओगे,
चाहें कितना भी रंग, कीचड़ लगाओगे।
दिमाग मेरा अल्ट्रासाउंड, आँखें एक्सरे,
हम बाल मनोविज्ञान की पढ़ाई हैं करे।

बच्चे बोले हमें होली तो मनाने दीजिए,
आप भी अपने बच्चों संग होली कीजिए।
क्यों त्यौहार पर भी आप आ गए गाँव,
आज तो न ही निकालते घर से पाँव।

मास्टर जी बोले हमारी यही कहानी है,
रविवार, जयंती पर भी ड्यूटी बजानी है।
आज तो होली पर भी सेल्फी खिंचानी है,
मास्टर पर चलती सभी की मनमानी है।

मास्टर जी ने बच्चों के मुँह को धुलाया,
फिर सबके थोड़ा-थोड़ा रंग लगवाया।
उसके बाद एक बढ़िया फोटो खिंचवाया,
तब जाकर मास्टर जी को चैन आया।

गाँव में सिग्नल नहीं मिल पा रहे थे,
इसलिए फोटो आगे नहीं जा रहे थे।
सोचा घर पहुँचकर ही भेजूँगा फोटो,
 गाँव से निकलते ही पकड़ा ऑटो।

घर पहुँचे तब तक न बचा था हुड़दंग,
सूख चुका था पिचकारी में भरा रंग।
मास्टर जी पर किसी ने न किया गौर,
पानी से नहाने का चलने लगा था दौर।

मास्टर जी ने जेब से निकाला मोबाइल,
तुरन्त भेजी सेल्फी फोटो वाली फ़ाइल।
थोड़ी देर में पलटकर आया एक संदेश,
सेल्फी खिंचवाने का न था कोई आदेश।

किसी ने होली पर किया था उपहास,
अटका दी थी मास्टर जी की श्वांस।
आदेश भेजने वाले ने ठहाका लगाया,
और फिर मास्टर जी को ये समझाया।

इतना गम्भीर होकर न जिया करो,
जीवन में हँसी के कुछ रंग भरो।
नौकरी के अलावा भी है जीवन,
परिवार ही होता है असली धन।

होली है हँसिए और हँसाते रहिए,
फाल्गुन के गीत भी गाते रहिए।
होली है तो जीवन में ठिठोली है,
तभी तो कहते बुरा न मानो होली है,
बुरा न मानो होली है।

रचनाकार

प्रांजल सक्सेना 
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शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

एलियंस आ गए तो

युवावस्था  15  से  35  वर्ष  की  मानी  जाती  है।  यद्यपि  हमारे  बाल  20  में  ही  पक  गए  थे  और  अब  तो  साँस  भी  फूलने  लगी  है।  कमरदर्द  तो  महीने  में  दो  दर्दनिवारक  ट्यूब  का  व्यय  करा  ही  देता  है  पर  जब  हमने  एक  बार  पढ़  लिया  कि  35  वर्ष  तक  व्यक्ति  युवा  रहता  है  तो  उससे  पहले  स्वयं  को  अधेड़  मानने  का  प्रश्न  ही  नहीं  उठता।  इसलिए  अभिनेत्रियों  के  नए – नए  वीडियो  हम  यूट्यूब  पर  खोजते  रहते  हैं।  पिछले  रविवार  की  सुबह  भी  हमने  लैपटॉप  पर  यूट्यूब  खोला  और  सोचा  कि  आज  आलिया  भट्ट  का  वीडियो  देखेंगे।  इसलिए  टाइप  किया  Alia  Bhatt  in  March,  पर  इतने  में  ही  हमारी  धर्मपत्नी  कमरे  में    गयीं  और  घबराहट  में  हमसे  आलिया  की  बजाय  एलियन  टाइप  हो  गया।  अब  जो  वीडियो  खुला  उसका  पहला  ही  संवाद  था  कि  मार्च  में  तबाही  आने  वाली  है।  तबाही  शब्द  सुनते  ही  एकबारगी  हमें  लगा  कि  अगली  फिल्म  में  आलिया  वास्तव  में  अभिनय  करने  वाली  हैं  पर  तभी  भाँति – भाँति  की  उड़नतश्तरियों  और  गंजे  सिर  के  तीन  ऊँगलियों  वाले  हाथ  रखने  वालों  के  फोटो  आने  लगे  तो  पूर्ण  विश्वास  हो  गया  कि  आलिया  के  वास्तविक  अभिनय  जितनी  बड़ी  तबाही  नहीं  आने  वाली।  
खैर  अच्छी  बात  ये  रही  कि  पत्नी  के  सामने  ये  बात  खुलने  से  रह  गयी  कि  हम  आलिया  का  वीडियो  देख  रहे  थे।  इसलिए  हमने  वो  वीडियो  चलने  दिया।  वीडियो  में  बताया  गया  कि  एलियंस  मार्च  में  कभी  भी    सकते  हैं  और  फिर  वो  धरती  पर  सभी  मानवों  को  अपना  गुलाम  बना  लेंगे।  ये  एक  चिंताजनक  बात  थी।  पर  महिला  होने  के  नाते  धर्मपत्नी  जी  ने  हमसे  अधिक  चिंताग्रस्त  मुद्रा  में  कहा – ऐ!  जी  आपको  क्या  लग  रहा  है?  मार्च  के  शुरू  में  आएँगे  कि  अंत  में?
मैंने  वीडियो  को  पॉज  किया  और  कहा – पता  नहीं  इन  वैज्ञानिकों  का,  जिस  दिन  बारिश  होने  का  ऐलान  करते  हैं  उसके  दो  दिन  बाद  ही  होती  है  मुझे  तो  लगता  है  कि  अप्रैल  से  पहले    आने  के।
धर्मपत्नी  ने  कहा – पर    तो  रहे  हैं    सबसे  बुरी  खबर  तो  यही  है।  ऐसा  है  जी  की  दुनिया  तो  होने  वाली  है  खत्म।  अब  आप  मेरी  वो  इच्छाएँ  पूरी  कर  दीजिए  जिन्हें  आप  कभी  अगला  वेतन  मिलने  तो  कभी  अगला  बोनस  मिलने  के  नाम  पर  टाल  देते  हैं।  वर्ना  मेरी  आत्मा  तो  मरने  के  बाद  भटकेगी।  मैं  कागज  लाती  हूँ  इच्छाएँ  लिखने  को।
मन  में  तो  आया  कि  कह  दूँ  कि  जब  दुनिया  ही  खत्म  हो  जाएगी  तो  तुम्हारी  आत्मा  भटककर  किसे  परेशान  कर  लेगी?  पर  तार्किक  बातें  वो  भी  पत्नी  से  करने  की  हिम्मत  नहीं  की।  मैंने  कहा – पर  अगर  एलियन    आए  तो  या  आए  और  हमसे  हार  गए  तो  या  आए  और  नेताओं  ने  उन्हें  अपनी  तरह  भ्रष्ट  बनाकर  उन्हें  पैसे  से  खरीद  लिया  तो  या  कॉलोनी  के  सचिव  शर्मा  जी  ने  चंदा  करके  उन्हें  पैसे  दे  दिए  कि  हमारी  कॉलोनी  को  बख्शकर  कहीं  और  तबाही  करो  तब  तो  हम  लोग  बच  जाएँगे  और  ये  फिजूलखर्ची  से  बैंकबैलेंस  कम    हो  जाएगा?
अपना  पक्ष  हमने  उतनी  ही  मजबूती  से  रखा  जितनी  मजबूती  से  आत्मसमर्पण  करने  वाले  डाकू  का  पक्ष  उसका  अधिवक्ता  रखता  है  अब  तक  धर्मपत्नी  एक  कागज  कलम  लेकर  मेरे  पास  बैठ  चुकी  थी।  उसने  कहा – फिजूलखर्ची  होगी  आपके  लिए  मेरे  लिए  तो  जरूरतें  की  चीजें  हैं।  पिछली  सप्ताह  मॉल  में  मुझे  एक  588  की  लिपिस्टिक  पसंद  आयी  थी  वो  तो  चाहिए  ही  चाहिए।
मैंने  कहा – पर  पिछले  वेतन  से  ही  तो  200  की  लिपिस्टिक  दिलायी  थी।  अभी  तो  वही  आधी  बची  होगी।
धर्मपत्नी  ने  कहा – लिपिस्टिक  तो  आधी  बची  है  पर  जिंदगी  तो  आधी  भी  नहीं  बची।  आधी  क्या  आधे  महीने  की  भी  नहीं  बची।  अब  सब  इच्छाएँ  तो  अभी  पूरी  करनी  हैं  न।  इसलिए  मुझसे  बहस  मत  कीजिए  और  लिखिए  कागज  पर।
धर्मपत्नी  की  लिपिस्टिक  की  माँग  की  तीव्रता  ने  मेरे  लिप्स  पर  मानो  फेवीस्टिक  लगा  दी  थी  और  मैंने  कागज  पर  पहली  माँग  उतार  ही  दी।  माँगों  की  बोहनी  होने  की  प्रसन्नता  का  भाव  धर्मपत्नी  के  मुख  पर    गया।  पत्नीश्री  ने  एलियंस  के  आने  के  पॉज  करे  हुए  वीडियो  को  प्ले  किया।  वीडियो  में  बताया  गया  कि  एलियंस  आएँगे  तो  संसार  में  बस  एक  ही  धर्म  रह  जाएगा  जिसका  पालन  एलियंस  अनिवार्य  रूप  से  करवाएँगे। 
पत्नीश्री  ने  वीडियो  पुन: पॉज  किया  और  धर्मपत्नी  जी  ने  दूसरी  माँग  रखी – सुनिए जी,  पिछले  तीन  साल  से  आप  जागरण  टाल  रहे  हैं।  इस  बार  तो  जागरण  कराना  ही  पड़ेगा।
आलस  का  भाव  मुझमें  इतना रहता  है  कि  दिन  में  दो  घण्टे  सोए  बिना  रात  को  नींद नहीं  आती,  तो  ये  जागरण  में  कौन  जगेगा।  मैंने  कहा – अरी!  भाग्यवान  जागरण  कराकर  क्या  करोगी?  वैसे  ही  मुनिया  जिस  दिन  रात  में  उठ  जाती  है  उस  रात  नींद  टूटने  से  जागरण  हो  जाता  है।  ऊपर  से  कुछ  ही  रातें  रह  गयी  हैं  जब  हम  लोग  चैन  की  नींद  सो  सकते  हैं  तो  जागरण  कराकर  एक  रात  क्यों  खराब  करवा  रही  हो?
धर्मपत्नी  ने  कहा – देखिए  जी,  मैंने  तीन  महीने  पहले  आपके  साथ  वो  बनारसी  साड़ी  खरीदी  थी  उसे  आज  तक  पहनने  का  मौका  नहीं  लगा  है।  वो  पड़ोस  की  सुशीला  को  देखिए  कोसा  सिल्क  की  ही  साड़ी  लायी  थी  और  तीसरे  दिन  ही  कथा  का  बुलावा  देकर  सबको  साड़ी  दिखा  दी।  एक  मैं  हूँ  जो  तीन  महीने  से  इंतजार  कर  रही  हूँ।  ऊपर  से  एलियंस  अपना  धर्म  लागू  कर  देंगे  तब  तो  जागरण  हो  ही  नहीं  पाएँगे।  इसलिए  अबकि  तो  जागरण  कराइए  ही  कराइए।
धर्मपत्नी  जी  के  जागरण  कराने  का  कारण  उतना  ही  विचित्र  था  जितनी  विचित्र  एलियंस  की  सूरत  होती  है।  पर  दोनों  पर  ही  टिप्पणी  व्यर्थ  होती  है।  अत:  मैंने  चुपचाप  पत्नी  की  ये  माँग  भी  नोट  कर  ली।  अब  पत्नी  ने  अपने  गाल  पर  हाथ  रखा  और  तर्जनी  ऊँगली  गति  की  अवस्था  में  थी।  ऐसी  मुद्रा  को  कुछ  मनोवैज्ञानिकों  ने  सोचने  की  मुद्रा  बताया  है  और  पत्नी  के  इसी  मुद्रा  में  आने  से  हमें  डर  लगता  है।  खैर  पत्नी  जी  इस  मुद्रा  में    ही  चुकी  थीं  और  वास्तव  में  कुछ  सोचकर  कहा – उटी  सही  रहेगा
मैंने  कहा – उटी?  पर  किसलिए?
धर्मपत्नी  ने  कहा – घूमने  के  लिए  और  किसलिए?  आखिर  इंसान  उटी  और  किसलिए  जाता  है?
मैंने  कहा – पर  उटी  तो  अपने  घर  से  बहुत  दूर  है,  वहाँ  जाकर  क्या  करोगी?  आगरा  चलो    वो  पास  में  है,  जाना  सस्ता  है  और  वहाँ  दुनिया  का  सातवाँ  आश्चर्य  भी  है – ताजमहल।
हमने  आश्चर्य  के  नाम  पर  पैसा  बचाने  का  एक  प्रयास  किया  जिसे  धर्मपत्नी  ने  ये  कहकर  असफल  किया – ओफ्फो,  मैंने  भी  कहाँ  मास्टर  से  शादी  कर  ली।  सब  के  सब  ओल्डफैशन  होते  हैं।  आपको  कुछ  पता  तो  है  नहीं  ताजमहल  में  कुँवारे  जोड़े  ज्यादा  जाते  हैं  और  हनीमून  के  लिए  लोग  उटी  जाते  हैं।  हमारा  हनीमून  तो  नहीं  है  पर  हम  शादीशुदा  हो  चुके  हैं  इसलिए  पहाड़  पर  ही  जाएँगे।  आप  उटी  लिखिए,  वो  भी  गाड़ा  करके  और  हाँ  ब्रेकेट  में  बर्फ़  में  खेलना  भी  लिख  लीजिएगा,  कहीं  कुछ  रह    जाए।
काँपते  हाथों  से  हमने  उटी  लिख  दिया।  उधर  पत्नी  ने  पुन:  पॉज  वीडियो  को  प्ले  किया।  वीडियो  में  बताया  गया  कि  जहाँ  पर  लोग  एलियंस  की  बातें  नहीं  मानेंगे  वहाँ  पर  एलियंस  बमवर्षा  करेंगे।  धर्मपत्नी  ने  ये  देखकर  वीडियो  पॉज  किया  और  कहा – अब  तो  अपनी  कॉलोनी  पर  बम  गिरेगा  ही  गिरेगा  ये  पड़ोस  वाली  गुप्ताइन  है    इसका  तो  रिकॉर्ड  है  कि  अपने  पति  तो  क्या  कभी  अपने  माँ – बाप  की  भी    सुनी  तो  एलियंस  की  क्या  सुनेगी  और  वो  सात  नम्बर  गली  वाली  प्रियंका  वो  तो  औरत  होकर  भी  ब्यूटी  पार्लर  वाली  तक  से  झगड़ा  कर  लेती  है  तो  एलियंस  की  क्या  सुनेगी।  देखिए  जी,  अपनी  कॉलोनी  पर  बम  गिरे  इससे  पहले  मेरी  बर्थडे  पार्टी  करा  दीजिए।  आपने  शादी  के  बाद  मेरा  एक  भी  बर्थडे  ठीक  से  नहीं  मनाया  और  पिछले  बर्थडे  को  तो  स्कूल  में  इंस्पेक्शन  के  नाम  पर  छुट्टी  भी  नहीं  ली  थी।
पत्नीश्री  की  माँगसूची  बढ़ती  ही  जा  रही  थी  और  बैंकबैलेंस  की  राशि  मुझे  घटते  हुए  दिखायी  दे  रही  थी  मैंने  कहा – ये  माँग  बिल्कुल  भी  नहीं  मानी  जाएगी।  बताओ  तो  तुम्हारा  जन्मदिन  होता  है  दिसम्बर  में।  तब  तक  दुनिया  वैसे  ही  समाप्त  हो  जाएगी  या  एलियंस  की  गुलाम  हो  जाएगी  तो  तुम्हारा  जन्मदिन  कैसे  धूमधाम  से  मनेगा?  
धर्मपत्नी  ने  कहा – अरे!  इसीलिए  तो  मैं  अभी  अपना  बर्थडे  मनाना  चाहती  हूँ।  क्योंकि  दिसम्बर  में  तो  मौका  मिलेगा  नहीं  बर्थडे  मनाने  का।  मैं  आज  ही  अपने  फेसबुक  प्रोफाइल  पर  अपनी  बर्थ  डेट  बदल  दूँगी।  आप  कोई  डेट  बता  दीजिएगा  जिस  दिन  आपको  छुट्टी  मिल  सके  उसी  दिन  बर्थडे  पार्टी  मना  लूँगी।
मैंने  कहा – छुट्टी  क्यों  खराब  करवा  रही  हो  जब  मनमर्जी  मना  रही  हो  तो  अगले  रविवार  को  मना  लेना।
धर्मपत्नी  जी  ने  कहा – हद  है  आपसे!  इस  जन्म  में  तो  सोलह  सोमवार  के  व्रत  सही  से  रखे  थे।  पर  पता  नहीं  पिछले  जन्म  के  कौन  से  कर्म  थे  जो  आप  जैसा  बेरोमांटिक  पति  मिला।  रविवार  को  बर्थडे  मनाएँगे  तो  लोगों  को  लगेगा  कि  आप  मुझसे  प्यार  नहीं  करते।  आप  मेरे  बर्थडे  के  लिए  छुट्टी  लेंगे  तो  मेरी  भी  कॉलोनी  में  साख  बढ़ेगी।  वैसे  भी  एलियंस  ने  छुट्टियाँ  खत्म  कर  दीं  तो  आपकी  बची  हुई  छुट्टियाँ  बेकार  ही  हो  जाएँगी।  इसलिए  बुधवार  को  जन्मदिन  मनाएँगे  उस  दिन  किसी  का  व्रत  भी  नहीं  होता।  इसे  भी  नोट  कीजिए  जी।
सिर  झुकाकर  हमने  ये  माँग  भी  लिख  ली।  फिर  वीडियो  को  पॉज,  प्ले  करने  का  खेल  चलता  रहा।  प्रत्येक  पॉज  के  बाद  पत्नीश्री  एक  नयी  माँग  रखती  थीं  जिसे  मजबूरनवश  हमें  लिखना  पड़ता।  कागज  भर  चुका  था  और  पत्नी  पुन:  प्ले  का  बटन  दबाने  जा  रही  थी  पर  हमने  रोकते  हुए  कहा – अरी!  भाग्यवान  मैं  इतनी  देर  से  तुम्हारी  इच्छाएँ  लिख  रहा  हूँ  अब  तनिक  साँस  तो  लो  और  दो  घूँट  पानी  तो  ले  आओ।
धर्मपत्नी  जी  ने  कहा – ठीक  है  जी  ला  रही  हूँ  पर  इस  कागज  पर  नीचे  एक  नोट  लिख  दीजिए  कि  मैं  हर  हाल  में  इन  माँगों  को  पूरा  करूँगा  और  अपने  हस्ताक्षर  कर  दीजिए।  फिर  इसे  मैं  लॉकर  में  रखकर  आपको  पानी  लाती  हूँ।  आपका  क्या  भरोसा  कल  को  मुकर  गए  तो।  
धर्मपत्नी  जी  के  वाक्य  को  पत्थर  की  लकीर  मानकर  हमने  हस्ताक्षर  करके  अपने  कल्पपुरूष  होने  पर  मोहर  लगायी।  धर्मपत्नी  जी  माँगसूची  को  लेकर  चली  गयीं  और  मैंने  राहत  की  साँस  ली।  15  सेकण्ड  के  बचे  उस  वीडियो  पर  प्ले  बटन  को  दबाया  और  क्या  सुनता  हूँ  एलियंस  के  आने  की  ऐसी  कई  अफवाहें  और  झूठे  वीडियो  यूट्यूब  पर  चल  रहे  हैं।  एलियंस  के  बारे  में  नासा  या  इसरो  ने  कोई  पुष्टि  नहीं  की  है।  अत:  ऐसी  अफवाहों  से  सावधान  रहें।
धत्त  तेरे  की’,  उफ्फ’,  हाय  रे!  अफसोस  प्रकट  करने  के  इतने  ही  शब्द  आते  थे  हमें।  मति  मारी  गयी  थी  हमारी  जो  अंत  के  15  सेकण्ड  का  वीडियो  प्ले  होने  से  पहले  ही  पत्नीश्री  को  यहाँ  से  हटा  दिया  था।  ऊपर  से  माँगसूची  पर  हस्ताक्षर  और  कर  दिए  थे।  अब  एलियंस  आएँ  या    आएँ  पर  पत्नी  की  माँगसूची  को  मना  करने  का  साहस  मुझमें  नहीं  था।  हम  अपना  सिर  पकड़कर  बैठे  थे  इतने  में  ही  पत्नी  पानी  ले  आयी  और  हमसे  पूछा – क्या  हुआ  जी,  अंत  के  15  सेकण्ड  में  क्या  था?
मैंने  कहा – बस  यही  कि  एलियंस  आने  से  पहले  ही  लोगों  के  बैंक  अकाउंट्स  खाली  कर  देंगे।      


लेखक
प्रांजल सक्सेना 
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