गुरुवार, 15 नवंबर 2012

चित्रगुप्त जी की जय

मित्रों ,

आजकल हर मॉल , बैंक और कई विध्यालयों में भी लिखा रहता है कि आप गुप्त कैमरों की नजर में हैं ।

ये पढ़कर अक्सर हम सतर्कता से व्यवहार करने लगते हैं । चाहे हमारा कुछ गलत करने का विचार ना भी हो तो भी हमारे व्यवहार में कुछ अस्थाई परिष्करण अवश्य हो जाता है और गुप्त कैमरों की सीमा से बाहर आते ही हम राहत की सांस लेते हैं और फिर चिंता कम हो जाती है ।

पर वास्तव में जब हमें लगने लगता है कि हम गुप्त चित्रों खींचने वाले कैमरे की सीमा से बाहर आ गये हैं । तब भी हम पर हर पल एक दृष्टि रखी रहती है - चित्रगुप्त द्वारा । हम जो भी करते हैं उसके तकनीकी गुप्त चित्र भले ही ना खिंच पायें पर चित्रगुप्त जी के पास पूरा लेखा-जोखा रहता है , इसलीये मेरा मानना है कि आज चित्रगुप्त जयंती के दिन इस बात पर मनन करना चाहिये कि गुप्त चित्रों के सम्राट चित्रगुप्त जी के पास पूरा लेखा-जोखा है तो फिर हर समय यही मानते रहें कि हम गुप्त कैमरों की नजर में हैं और कुछ भी गलत करने से डरें ।

तो बोलिये चित्रगुप्त जी की जय !




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