गुरुवार, 15 नवंबर 2012

चित्रगुप्त जी की जय

मित्रों ,

आजकल हर मॉल , बैंक और कई विध्यालयों में भी लिखा रहता है कि आप गुप्त कैमरों की नजर में हैं ।

ये पढ़कर अक्सर हम सतर्कता से व्यवहार करने लगते हैं । चाहे हमारा कुछ गलत करने का विचार ना भी हो तो भी हमारे व्यवहार में कुछ अस्थाई परिष्करण अवश्य हो जाता है और गुप्त कैमरों की सीमा से बाहर आते ही हम राहत की सांस लेते हैं और फिर चिंता कम हो जाती है ।

पर वास्तव में जब हमें लगने लगता है कि हम गुप्त चित्रों खींचने वाले कैमरे की सीमा से बाहर आ गये हैं । तब भी हम पर हर पल एक दृष्टि रखी रहती है - चित्रगुप्त द्वारा । हम जो भी करते हैं उसके तकनीकी गुप्त चित्र भले ही ना खिंच पायें पर चित्रगुप्त जी के पास पूरा लेखा-जोखा रहता है , इसलीये मेरा मानना है कि आज चित्रगुप्त जयंती के दिन इस बात पर मनन करना चाहिये कि गुप्त चित्रों के सम्राट चित्रगुप्त जी के पास पूरा लेखा-जोखा है तो फिर हर समय यही मानते रहें कि हम गुप्त कैमरों की नजर में हैं और कुछ भी गलत करने से डरें ।

तो बोलिये चित्रगुप्त जी की जय !




बुधवार, 14 नवंबर 2012

एग्जामनर का अर्थ ( कुछ संदर्भों में )

मित्रों ,

अण्डा (एग) अपने बेसिक शिक्षा विभाग का बड़ा ही जाना-पहचाना और प्रतिदिन प्रयोग में आने वाला शब्द है। मेरे जीवन में तो इसका अत्यंत ही योगदान रहा है ।


आगे बढ़ने से पहले एक बात स्पष्ट कर दूँ कि अण्डे (एग) का अर्थ  0 (शून्य) से है ना कि किसी पक्षी के अण्डे (एग) से ।

हाँ तो मैं अण्डे(एग) के योगदान के बारे में कह रहा था । जब हम कक्षा में मास्टर जी के किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाते थे तो मास्टर जी कहते थे कि क्या आता है तुम्हें अण्डा (एग) या फिर मास्टर जी कहते थे अगर ठीक से पढ़ोगे-लिखोगे नहीं तो एग्जाम में अण्डा (एग) मिलेगा । मेरा तो बचपन में प्रतिदिन ही ऐसे वाक्यों से सामना होता था । क्या करूँ मेरी कच्ची पोई है ना ।

कुछ दिन पहले मेरे एक मित्र ने मुझसे पूछा कि कुछ छात्र साल भर बहुत मेहनत से पढ़ते हैं ,पर फिर भी एग्जाम में उनके कम नंबर आते हैं ऐसा क्यूँ ?

कठिन प्रश्न सुनकर पहले तो मैं भी सोच में पढ़ गया पर तभी मैंने अपने कच्ची पोई वाले दिमाग का प्रयोग किया और उन मित्र को समझाया कि

'एग्जामनर' का अर्थ होता है ऐसा 'नर' जो 'जाम' लगाकर छात्रों को 'एग' (यानि अण्डा) अर्थात‌‌ शून्य देता है ।

क्या आपको भी लगता है कि सभी नहीं परन्तु कुछ 'एग्जामनर' के बारे में ये सही है ?

कच्ची पोई

                                              कच्ची पोई

              मित्रों नित प्रतिदिन हमें नये-नये अनुभव होते रहते हैं । कभी अच्छे और कभी कम अच्छे ।
मृत्यु के अतिरिक्त हर अनुभव ऐसा होता है , जिससे कुछ ना कुछ सीखा जा सकता है , दुःखी हुआ जा सकता है, रोया जा सकता है या फिर हँसा जा सकता है । मैं आखिरी वाले पर अधिक ध्यान देता हूँ ।
आखिरकार हँसना ही तो वो एकमात्र उपाय है ,जिससे रक्त बढ़ाया जा सकता है वो भी निःशुल्क!

 अक्सर लोग मुझसे कहते हैं कि तुम्हें तो कुछ आता ही नहीं या अरे तुम क्या जानो इस बारे में । देखने मैं छोटा-मोटा सा हूँ सम्भवतया इसलिये ।वैसे कई बार मुझे भी लगता है कि मुझे भी दुनियादारी के बारे अभी सम्भवतः कुछ कम ही पता है  । तभी मैंने इस ब्लॉग का नाम कच्ची पोई रखा है ,क्योंकि मेरा मानना है कि इस दुनिया में मेरी कच्ची पोई है ।